अनावरण 2027 के आरम्भ में
24 सितम्बर 2026 को श्री परशुराम कुंड में उपमुख्यमंत्री श्री चोवना मीन जी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अनावरण की यह समय-सीमा तय हुई। समारोह की तिथि और विवरण शीघ्र घोषित किए जाएँगे।
श्री परशुराम कुंड आमंत्रण यात्रा
4 से 24 दिसम्बर 2026
अयोध्याउत्तर प्रदेश
श्री परशुराम कुंडअरुणाचल प्रदेश
अनावरण से पहले विप्र फाउण्डेशन अयोध्या से श्री परशुराम कुंड तक यह यात्रा निकालेगा, जो देशभर के श्रद्धालुओं को समारोह में आमंत्रित करेगी।
प्रतिमा
विप्र फाउण्डेशन के अनुसार यह विश्व में भगवान परशुराम की सबसे ऊँची प्रतिमा है। पाँच वर्षों में यह संकल्प श्रद्धालुओं के स्वैच्छिक सहयोग और संगठन के निरंतर प्रयास से साकार हुआ।
- ऊँचाई
- 51 फीट, खड़ी मुद्रा
- धातु
- कांस्य: ताँबा, सीसा, टिन और जस्ता
- मूर्तिकार
- श्री नरेश कुमावत जी
- नाम
- ‘स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेंथ’, जो अगस्त 2025 में उपमुख्यमंत्री श्री चोवना मीन जी ने दिया
- स्थान
- श्री परशुराम कुंड, लोहित ज़िला, अरुणाचल प्रदेश
संकल्प से अनावरण तक
इन वर्षों में विप्र फाउण्डेशन ने देशभर में अमृत भारत रथ यात्रा निकाली, जिसकी एक ही यात्रा ने 12,427 किमी की दूरी तय की। प्रमुख शहरों में ‘अभिनन्दन अरुणाचल’ रोड शो हुए, और 2022 से क्षेत्र में परशुराम राहत शिविर के पाँच आयोजन हो चुके हैं।
- आरम्भ
केन्द्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी की प्रेरणा से परियोजना की शुरुआत हुई।
- मई 2022
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने श्री परशुराम कुंड में भूमि पूजन किया।
- जुलाई 2024
प्रतिमा की नींव का कार्य पूर्ण हुआ।
- अगस्त 2025
उपमुख्यमंत्री श्री चोवना मीन जी ने प्रतिमा को ‘स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेंथ’ नाम दिया।
- 2026
51 फीट की प्रतिमा स्थापित हुई। 24 सितम्बर की समीक्षा बैठक में अनावरण की समय-सीमा तय हुई।
- दिसम्बर 2026
अयोध्या से श्री परशुराम कुंड तक आमंत्रण यात्रा, 4 से 24 दिसम्बर।
- 2027 के आरम्भ में
प्रतिमा का अनावरण।
श्री परशुराम कुंड
अरुणाचल प्रदेश के लोहित ज़िले में लोहित नदी के तट पर स्थित श्री परशुराम कुंड एक प्राचीन तीर्थ है। मान्यता है कि यहीं स्नान करने पर भगवान परशुराम के हाथ से उनका परशु छूटा था।
यह तीर्थ भारत के ईशान कोण में है, उस धरती पर जहाँ देश में सबसे पहले सूर्योदय होता है। आज भी प्रतिदिन सैकड़ों तीर्थयात्री यहाँ आते हैं। केन्द्र और राज्य सरकार तीर्थ का विकास कर रही हैं, और यह प्रतिमा उसी विकास की पूरक है।
विप्र फाउण्डेशन मानता है कि यह बढ़ती तीर्थ-परम्परा देशभर के श्रद्धालुओं को अरुणाचल की समृद्ध विरासत से जोड़ेगी और पूर्वोत्तर तथा शेष भारत के बीच के बंधन को और गहरा करेगी।
जन-सहयोग से साकार
अब तक प्राप्त न्यौछावर राशि
₹7,01,10,452
- योगदान
- —
- लक्ष्य
- ₹11,00,00,000
- पूरा
- 64%
₹100 से ₹25 लाख तक के योगदान ने यह संकल्प यहाँ तक पहुँचाया है। पूज्य संतों से लेकर देशभर के शुभचिंतकों तक, सभी दानदाताओं का हृदय से आभार। प्रतिमा के आसपास के शेष कार्य और अनावरण की तैयारी के लिए आपका सहयोग अभी भी आवश्यक है।
- विप्र फाउण्डेशन को आयकर की धारा 80G की स्वीकृति प्राप्त है। पुरानी कर व्यवस्था में आपको कर छूट मिल सकती है।
- भुगतान Razorpay द्वारा सुरक्षित होता है: UPI, कार्ड और नेट बैंकिंग।
- दान केवल भारतीय नागरिकों से स्वीकार किया जाता है।
विप्र फाउण्डेशन किसी व्यक्ति के निजी खाते या UPI में दान नहीं माँगता। कोई ऐसा करे तो भुगतान न करें और +91 84429 25500 पर सूचना दें।
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